आज फिर कोई याद आ रहा है

आज फिर मौसम भिगा रहा है

हवाओं की तपिश को बुझा रहा है

जिस्म में पर एक आग लगा रहा है

आज फिर कोई याद आ रहा है

बड़े दिनो के बाद ये सिसक जाग रही है

बड़े दिनो के बाद एक आह निकल रही है

रह रह के दिल की धड़कन बढ़ रही है

रह रह के बदन में सुरसुरी हो रही है

आज फिर किसी की याद आ रही है

ना जाने क्या था उस ज़माने में

कि पलट जाने की मचली हो रही है

ना जाने कौन था उन गलियों में

जिससे मिलने की कसक उठ रही है

आज फिर ये किसकी याद आ रही है

किसकी ज़ुल्फ़ों के बल गिर रहे हैं

किसकी आँखों से मद निकल रहें हैं

किसके होंठों पे ये लब मचल रहें हैं

किसके गालों में कपोल थिरक रहें हैं

किसकी यादों के आज ढोल बज रहें हैं

आज फिर मौसम ने क्या करवट ली है

आज फिर किसको बहला रहा है

हवाओं की तपिश को बुझा रहा है

जिस्म में पर एक आग लगा रहा है

आज फिर कोई याद आ रहा है