भारत का कर्मठ सपूत मैं

रक्षा राष्ट्र की करता हूँ,

तन मन अर्पित है मेरा

यहां का मैं भी चौकीदार हूँ।

बेटी भारत की सम्पूर्ण मैं

परम्पराओं की रखवार हूँ,

संस्कारों को संजोए रखूँ

यहां की मैं भी चौकीदार हूँ।

कर्मठ हूँ रोटी की खोज में

इक मेहनतकश कर्मवार हूँ,

रक्षा करता हूँ जीविका की मैं

परिवार का मैं भी चौकीदार हूँ।

सड़क पर चलता राही मैं

अगल बगल से खबरदार हूँ,

गतिविधियों पर सबकी नजर मेरी

समाज का मैं भी चौकीदार हूँ।

खेतों में टपकता पसीना मेरा

भारत का मैं भी पालनहार हूँ,

अन्न की रक्षा है कर्तव्य मेरा

इस धरती का मैं भी चौकीदार हूँ।

मलेच्छ दूर हो हर आंगन से

स्वछता का मैं पहरेदार हूँ,

गंदगी न फैलाये अब कोई

निगेहबान मैं भी चौकीदार हूँ।

भ्रस्टाचार से मुक्त हो देश मेरा

इस संकल्प का मैं उदगार हूँ,

न उत्कोच किसी को मैं अब दूंगा

तैनात हाँ मैं भी चौकीदार हूँ।

मुफ्त कुछ न लेना अब मुझे

पूरी कीमत देने को तैयार हूं,

निर्धन को मिले मदद अब पूरी

देख रहा मैं भी चौकीदार हूँ।

दूसरों को भी सही राह दिखलाये

ऐसी समाज की मैं ललकार हूँ,

न करे चोरी राष्ट्र से कोई मेरे

सतर्क खड़ा मैं भी चौकीदार हूँ।

राह पर नई भारत को ले जाऊं

ऐसी मज़बूत मैं पतवार हूँ,

कर्म करूं चाहे मैं कोई भी

पर देश का मैं भी चौकीदार हूँ।